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अदालत की सख्ती के बाद बड़ा कदम: जेल के बैरक नंबर-11 में शिफ्ट किया गया इस न्यूज़ चैनल का मालिक

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कानपुर। कथित उगाही और दुष्कर्म के गंभीर मामलों में न्यायिक हिरासत में चल रहे सेटेलाइट हिन्दी एबीसी न्यूज चैनल के मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे को आखिरकार उर्सला अस्पताल से वापस कानपुर जिला जेल भेज दिया गया है। अदालत द्वारा इस मामले में कड़ा रुख अपनाने के बाद, बुधवार शाम को उन्हें जिला जेल की बैरक संख्या-11 में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस और जेल प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

​अदालती आदेश के बाद हुई कार्रवाई

​उर्सला अस्पताल के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बुधवार शाम को पूर्वी जोन पुलिस और जेल प्रशासन की एक संयुक्त टीम अदालत का लिखित आदेश लेकर अस्पताल पहुंची। वहां की सभी जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अखिलेश दुबे को सुरक्षा के बीच जिला जेल के लिए रवाना किया गया।

​लंबे समय से अस्पताल में रहने पर खड़े हुए थे सवाल

​अखिलेश दुबे को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अप्रैल महीने में उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती दौर में उन्हें हृदय संबंधी दिक्कतें बताई गई थीं, लेकिन बाद में घुटने की गंभीर समस्या, अनियंत्रित मधुमेह (डायबिटीज) और अन्य बीमारियों को आधार बनाकर उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में ही रखा गया। उनकी इस लंबी मेडिकल भर्ती को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद उनकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया गया था।

​विरोधियों ने लगाए गंभीर आरोप

​अखिलेश दुबे के खिलाफ सक्रिय ‘अखिलेश मुक्ति मोर्चा’ ने इस पूरी स्थिति पर तीखी आपत्ति जताई थी। मोर्चा का आरोप था कि दुबे वास्तव में गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं, बल्कि वह कानून और जेल की सख्ती से बचने के लिए अस्पताल को एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। मोर्चा ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि विचाराधीन कैदी होने के बावजूद अस्पताल के निजी कमरे में उनसे मिलने वालों पर कोई रोक नहीं थी और वह वहां से मोबाइल फोन के जरिए अपने पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

​मेडिकल रिपोर्ट की विश्वसनीयता भी विवादों में

​उर्सला अस्पताल द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट में अखिलेश दुबे को सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण), यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), उच्च रक्तचाप और घुटने की लिगामेंट चोट से पीड़ित दिखाया गया था। रिपोर्ट में उनके घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement) के लिए उन्हें किसी बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की सिफारिश भी की गई थी।

​इसके विपरीत, विरोधी पक्ष ने इस मेडिकल रिपोर्ट को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया। उनका तर्क था कि सेप्टीसीमिया से जुड़ी जांचों में टीएलसी (Total Leucocyte Count) के आंकड़े बीमारी की गंभीरता को नहीं दर्शाते। चिकित्सा विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया गया कि यदि मरीज सचमुच सेप्टीसीमिया से पीड़ित होता, तो उसका टीएलसी स्तर सामान्य से बहुत ज्यादा होना चाहिए था।

​अदालत ने राहत देने से किया इनकार

​सूत्रों के अनुसार, बीते 4 जुलाई को अदालत में हुई पेशी के दौरान अखिलेश दुबे के पक्ष की ओर से स्वास्थ्य और लंबे समय से अस्पताल में भर्ती होने के आधार पर कानूनी राहत की मांग की गई थी, जिसे माननीय अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत की इसी सख्ती के बाद बुधवार को यह बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। फिलहाल, इस पूरे विवाद, मेडिकल रिपोर्ट और दावों-प्रतिदावों पर संबंधित जांच एजेंसियों की अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट आना बाकी है।

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Author: media4samachar

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