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पत्रकारों का शोषण करने वाले ऐसे न्यूज़ चैनलों से बचें: ‘सच बेधड़क’ न्यूज चैनल में दो महीने से वेतन संकट,प्रबंधन ने स्टाफ को किया ब्लॉक

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जयपुर | 27 अप्रैल, 2026

​दूसरों के हक के लिए आवाज उठाने और ‘बेधड़क’ सच बोलने का दावा करने वाले मीडिया संस्थानों का दोहरा चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। जयपुर स्थित क्षेत्रीय न्यूज़ चैनल ‘सच बेधड़क’ में इन दिनों सन्नाटा नहीं, बल्कि कर्मचारियों का आक्रोश व्याप्त है। संस्थान में काम करने वाले पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों को पिछले दो महीने से वेतन (Salary) नहीं दिया गया है, जिससे उनके सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

​चमकदार स्क्रीन के पीछे का कड़वा सच

​राजस्थान की राजधानी से संचालित होने वाले इस चैनल की स्क्रीन पर भले ही सब कुछ सामान्य दिखे, लेकिन इसके दफ्तर की दीवारों के पीछे कर्मचारी आर्थिक तंगी की मार झेल रहे हैं।

  • ​वेतन का अकाल: सूत्रों के अनुसार, फरवरी और मार्च महीने का वेतन अब तक कर्मचारियों के खातों में नहीं पहुँचा है।
  • ​EMI और उधारी का बोझ: दो महीने से सैलरी न मिलने के कारण युवा पत्रकारों के लिए कमरे का किराया देना और बैंक की किश्तें (EMI) चुकाना नामुमकिन हो गया है। कई कर्मचारी अब उधार लेकर घर चलाने को मजबूर हैं।

​मैनेजमेंट का ‘ब्लॉक’ कल्चर: संवाद की जगह तानाशाही

​इस मामले में सबसे शर्मनाक रवैया चैनल के प्रबंधन (Management) का रहा है। जब कर्मचारियों ने अपनी मेहनत की कमाई मांगी, तो उन्हें समाधान के बजाय ‘ब्लॉक’ का सामना करना पड़ा।

यही नहीं, जब ‘मीडिया4समाचार’ की टीम ने पत्रकारिता धर्म का पालन करते हुए इस मुद्दे पर प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने जवाब देने के बजाय प्रतिनिधियों को व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया और फोन उठाना बंद कर दिया।

​”जो संस्थान खुद को लोकतंत्र का प्रहरी कहता है, वह बुनियादी सवालों से इस कदर डरा हुआ है कि उसने संवाद के सारे दरवाजे बंद कर लिए हैं। यह न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि मीडिया की साख पर एक गहरा धब्बा है।”

 

​मीडिया के नए साथियों के लिए चेतावनी

​यह खबर उन सभी नवागंतुक पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के लिए एक चेतावनी है, जो बड़े-बड़े नामों और चकाचौंध को देखकर ऐसे संस्थानों से जुड़ते हैं। ‘सच बेधड़क’ का यह रवैया साफ करता है कि यहाँ कर्मचारियों की मेहनत की कोई कद्र नहीं है।

  • ​शोषण का नया मॉडल: काम के नाम पर दिन-रात मेहनत कराना और भुगतान के समय ‘ब्लॉक’ कर देना, मीडिया जगत में एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है।
  • ​पारदर्शिता का अभाव: यदि संस्थान किसी वित्तीय संकट में भी है, तो कर्मचारियों से संवाद करने के बजाय उन्हें ब्लॉक करना प्रबंधन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​श्रम विभाग और सामूहिक विरोध की तैयारी

​चैनल के भीतर अब सब्र का बांध टूट रहा है। सूत्रों का कहना है कि परेशान कर्मचारी अब कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही एक लिखित शिकायत श्रम विभाग (Labour Department) को सौंपी जा सकती है। साथ ही, जयपुर के पत्रकार संगठनों को भी इस आर्थिक शोषण के खिलाफ एकजुट होने की अपील की जा रही है।

​‘मीडिया4समाचार’ इस मामले में पीड़ित कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ा है। हम शासन-प्रशासन और श्रम विभाग से मांग करते हैं कि ऐसे संस्थानों पर नकेल कसी जाए जो पत्रकारों का हक मारकर अपनी दुकान चला रहे हैं।

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Author: media4samachar

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