नई दिल्ली: 90 के दशक में अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग, अनूठे डांस और अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता गोविंदा (Govinda) ने वरिष्ठ पत्रकार और टीवी एंकर चित्रा त्रिपाठी को दिए एक खास इंटरव्यू में अपनी निजी जिंदगी, फिल्मी करियर और राजनीति से जुड़े कई अनसुने पहलुओं पर खुलकर बात की है। इस विस्तृत बातचीत के दौरान अभिनेता ने जहां अपने करियर के सुनहरे दौर को याद किया, वहीं उस दौर के दर्द को भी बयां किया जब इंडस्ट्री के कई लोगों ने उनसे मुंह मोड़ लिया था।
1. “जब वक्त खराब होता है, तो अपने भी बदल जाते हैं”: बॉलीवुड की राजनीति पर छलका दर्द
इंटरव्यू के दौरान चित्रा त्रिपाठी ने जब गोविंदा के करियर में आए ठहराव और फिल्मों से दूरी को लेकर सवाल पूछा, तो अभिनेता काफी भावुक नजर आए। उन्होंने किसी का सीधा नाम लिए बिना कहा कि बॉलीवुड में एक ऐसा दौर आया जब उनके खिलाफ साजिशें रची गईं और उन्हें काम से अलग-थलग करने की कोशिश की गई।
- ग्रुपिज्म और बहिष्कार: गोविंदा ने संकेत दिया कि बड़े सितारों और कैंपों के दौर में उन्हें जानबूझकर दरकिनार किया गया।
- वित्तीय संघर्ष: उन्होंने साझा किया कि एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास फिल्में थीं, लेकिन उन्हें रिलीज नहीं होने दिया गया या सिनेमाघरों में सही स्क्रीन नहीं मिली।
2. डेविड धवन संग रिश्ते और टूटी दोस्ती की दास्तान
चित्रा त्रिपाठी ने 90 के दशक की सबसे सफल अभिनेता-निर्देशक जोड़ी यानी गोविंदा और डेविड धवन के रिश्तों पर भी तीखे सवाल किए। दोनों ने मिलकर ‘कुली नंबर 1’, ‘हीरो नंबर 1’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘राजा बाबू’ जैसी 17 से अधिक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं।
- गोविंदा ने माना कि एक समय के बाद उनके बीच दूरियां आ गईं।
- उन्होंने उस घटना का जिक्र किया जब उन्होंने डेविड धवन से एक फिल्म में साथ काम करने की इच्छा जताई थी, लेकिन निर्देशक की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। गोविंदा ने कहा, “मैंने हमेशा उन्हें बड़े भाई की तरह माना, लेकिन राजनीति हर जगह पहुंच जाती है।”
3. राजनीति में एंट्री, कांग्रेस से सांसद बनने का दौर और मोहभंग
चित्रा त्रिपाठी ने गोविंदा के राजनीतिक सफर पर भी विस्तार से चर्चा की। 2004 के लोकसभा चुनाव में मुंबई उत्तर सीट से राम नाइक जैसे दिग्गज नेता को हराकर संसद पहुंचे गोविंदा ने राजनीति के कड़वे अनुभवों को साझा किया।
- राजनीति छोड़ने का फैसला: गोविंदा ने स्पष्ट किया कि राजनीति उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं थी। जनता की सेवा की नीयत से वे आए थे, लेकिन सिस्टम की पेचीदगियों और राजनीतिक दांव-पेंचों के चलते उन्होंने खुद को इससे अलग करना ही बेहतर समझा।
- उन्होंने कहा कि उस दौर में उनके फिल्मी करियर को भी भारी नुकसान हुआ, जिसका पछतावा उन्हें आज भी कहीं न कहीं होता है।
4. ‘गोविंदा स्टाइल’ और आज का सिनेमा
चित्रा त्रिपाठी के साथ बातचीत के हल्के-फुल्के पलों में गोविंदा ने अपने प्रतिष्ठित गानों, डांस स्टेप्स और रंग-बिरंगे कपड़ों के चयन पर भी बात की।
- उन्होंने बताया कि उनके डांस स्टेप्स किसी कोरियोग्राफी से ज्यादा ‘नेचुरल फ्लो’ हुआ करते थे, जो आम जनता से सीधे जुड़ते थे।
- आज के कंटेंट-आधारित सिनेमा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने नए कलाकारों की तारीफ की, लेकिन यह भी कहा कि आज के दौर में 90 के दशक वाला ‘खालिस मनोरंजन’ और लार्जर-दैन-लाइफ आकर्षण कहीं खो गया है।
चित्रा त्रिपाठी के साथ यह इंटरव्यू न केवल एक सुपरस्टार के उत्थान और पतन की कहानी को सामने लाता है, बल्कि शोबिज की चकाचौंध के पीछे छिपे अकेलेपन और कड़वी हकीकत को भी उजागर करता है। बातचीत के अंत में गोविंदा ने उम्मीद जताई कि वे जल्द ही एक बार फिर अच्छे प्रोजेक्ट्स के जरिए अपने प्रशंसकों का मनोरंजन करते दिखाई देंगे।




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