देश के उभरते हुए राष्ट्रीय हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत एक्सप्रेस’ (Bharat Express) से मीडिया जगत की इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। चैनल के भीतर पिछले लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और प्रशासनिक फेरबदल का दौर अब एक बड़े क्लाइमेक्स पर पहुंच गया है। चैनल प्रबंधन ने एक बार फिर पुराने चेहरे पर भरोसा जताते हुए राधेश्याम राय को संस्थान की कमान सौंप दी है। राधेश्याम राय को ‘भारत एक्सप्रेस’ में मैनेजिंग एडिटर (Managing Editor) की बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
इस नए बदलाव के साथ ही चैनल के दो सबसे बड़े चेहरों—पूर्व ग्रुप सीईओ वरुण कोहली और पूर्व मैनेजिंग एडिटर मिहिर रंजन का सफर फिलहाल इस संस्थान से समाप्त हो गया है।
लंबे समय से चल रही थी अंदरूनी ‘पॉलिटिक्स’, एक के बाद एक गिरे विकेट
मीडिया गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, ‘भारत एक्सप्रेस’ के भीतर पिछले काफी समय से शीर्ष स्तर पर वर्चस्व और नीतियों को लेकर गंभीर खींचतान चल रही थी। अंदरूनी राजनीति और वैचारिक मतभेद इस कदर हावी हो चुके थे कि संस्थान में कामकाज का माहौल प्रभावित हो रहा था।
इस आंतरिक कलह का पहला बड़ा असर तब देखने को मिला, जब चैनल के ग्रुप सीईओ (Group CEO) वरुण कोहली को बेहद कम समय में ही संस्थान से अलग होना पड़ गया। वरुण कोहली के जाने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि चैनल के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। इस इस्तीफे के तुरंत बाद, चैनल के कर्ताधर्ता रहे मैनेजिंग एडिटर मिहिर रंजन ने भी परिस्थितियों को भांपते हुए इस ‘ऑफिस पॉलिटिक्स’ से खुद को दूर रखना बेहतर समझा और अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
मिहिर रंजन का जाना: चैनल के लिए बड़ा एडिटोरियल झटका
’भारत एक्सप्रेस’ के शुरुआती दौर से लेकर उसे एक पहचान दिलाने में वरिष्ठ पत्रकार मिहिर रंजन की भूमिका को बेहद खास माना जाता रहा है। वे महज एक नाम नहीं, बल्कि चैनल के पूरे संपादकीय ढांचे की रीढ़ थे।
- संपादकीय रणनीति (Editorial Strategy): चैनल की वैचारिक दिशा, डिबेट्स के मुद्दे और खबरों की कवरेज का पूरा खाका मिहिर रंजन ही तैयार करते थे।
- आउटपुट संचालन (Output Operations) के सर्वेसर्वा: स्क्रीन पर क्या जाएगा, खबरों की भाषा कैसी होगी और बुलेटिन को कितना धारदार बनाया जाए, इसका पूरा जिम्मा उन्हीं के कंधों पर था।
कंटेंट को दर्शकों तक सटीक और प्रभावी ढंग से पहुंचाने में माहिर मिहिर रंजन के अचानक अलग होने से चैनल के आउटपुट विंग के सामने एक बड़ा वैक्यूम (खालीपन) पैदा हो गया है।
राधेश्याम राय की वापसी: क्या थमेगा अंदरूनी संकट?
ऐसे नाजुक मोड़ पर राधेश्याम राय की मैनेजिंग एडिटर के रूप में वापसी को प्रबंधन का एक ‘डैमेज कंट्रोल’ कदम माना जा रहा है। राधेश्याम राय पहले भी इस संस्थान का हिस्सा रह चुके हैं और यहां की कार्यप्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ हैं। उनके सामने अब चुनौतियां कम नहीं होंगी:
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चुनौती का क्षेत्र |
मुख्य कार्य |
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टीम का मनोबल |
शीर्ष नेतृत्व के लगातार बदलने से डगमगाए कर्मचारियों के भरोसे को दोबारा जीतना। |
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कंटेंट की गुणवत्ता |
मिहिर रंजन के जाने के बाद खबरों की धार और स्क्रीन की चमक को फीका न पड़ने देना। |
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चैनल को स्थिरता |
आंतरिक गुटबाजी और राजनीति को खत्म कर एक स्वस्थ वर्किंग एनवायरमेंट तैयार करना। |
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि: “किसी भी नए चैनल के लिए शुरुआती 2-3 साल साख बनाने के होते हैं। ऐसे में सीईओ और मैनेजिंग एडिटर जैसे पदों पर इतनी जल्दी बदलाव होना स्क्रीन पर भी असर डालता है। अब पूरा दारोमदार राधेश्याम राय पर है कि वे इस बिखराव को कैसे संभालते हैं।”
भविष्य की राह और टीआरपी की जंग
न्यूज रूम के इस बड़े तख्तापलट का ‘भारत एक्सप्रेस’ की टीआरपी (TRP) और उसकी स्क्रीन प्रेजेंटेशन पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा। वहीं, मीडिया जगत की नजरें इस बात पर भी टिकी हैं कि वरुण कोहली और मिहिर रंजन जैसे कद्दावर नाम अब अपनी अगली पारी की शुरुआत कहाँ से करते हैं।




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