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Zee के चेयरमैन डॉ.सुभाष चंद्रा की दो टूक चेतावनी: गलत जानकारी नहीं हटाई तो होगी कानूनी कार्रवाई

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नई दिल्ली: ​ज़ी (Zee) समूह के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके व्यक्तिगत दिवालिया मामले (Personal Bankruptcy Case) से जुड़ी भ्रामक और गलत जानकारी को एक हफ्ते के भीतर नहीं हटाया गया, तो संबंधित प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. चंद्रा की ओर से सोशल मीडिया कंपनियों से मांग की गई है कि वे 26 से 29 अगस्त के बीच विभिन्न अकाउंट्स के जरिए शेयर किए गए आपत्तिजनक पोस्ट्स को तुरंत हटाएं। इसके साथ ही उन्होंने इन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी ओर से जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण को भी प्रमुखता से प्रकाशित करने को कहा है।

​व्यक्तिगत गारंटी और ₹22,000 करोड़ का पूरा मामला

​यह पूरा विवाद डॉ. सुभाष चंद्रा द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटियों (Personal Guarantees) से जुड़ा हुआ है। उनके कार्यालय से जारी बयान के मुताबिक, उन्होंने कुल मिलाकर लगभग ₹22,000 करोड़ की व्यक्तिगत गारंटी पर हस्ताक्षर किए थे।

​इनमें से लगभग ₹4,800 करोड़ की गारंटी उस वक्त दी गई थी जब संबंधित संस्थाओं द्वारा फंड उधार लिया गया था, जबकि बाकी की गारंटी डिफॉल्ट होने के बाद दी गई थी। डॉ. चंद्रा ने इस बात पर जोर दिया है कि उन्होंने व्यक्तिगत क्षमता में एक भी रुपया उधार नहीं लिया था। उनके कार्यालय ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा है— “Borrowing by me, Dr Subhash Chandra: ₹0”। यानी जिन कर्जों और दावों को लेकर चर्चा हो रही है, वे अलग-अलग व्यावसायिक कंपनियों द्वारा लिए गए थे, न कि डॉ. चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत तौर पर।

​सोशल मीडिया कैंपेन और #PaisaWapasKaro पर आपत्ति

​बीती 30 अगस्त को डॉ. सुभाष चंद्रा के कार्यालय की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया था, जिसमें सोशल मीडिया पर चल रहे #PaisaWapasKaro जैसे हैशटैग वाले पोस्ट्स का विशेष रूप से जिक्र किया गया था। बयान में कहा गया था कि इस पूरे मामले को लेकर एक गलत धारणा और समझ बनाई जा रही है।

​डॉ. चंद्रा का कहना है कि 26 से 29 अगस्त के बीच सोशल मीडिया पर उनके दिवालिया मामले को लेकर जो तथ्य परोसे गए, वे तथ्यात्मक रूप से गलत और उनकी छवि को धूमिल करने वाले हैं। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा यानी एक सप्ताह के भीतर इन भ्रामक पोस्ट्स को हटाकर स्पष्टीकरण नहीं सुधारा गया, तो कानूनी कदम उठाना अनिवार्य हो जाएगा।

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Author: media4samachar

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