मुख्य बिंदु:
- आरोपी अभिषेक सिंह सानू पर दर्ज हैं छेड़खानी समेत कई आपराधिक मुकदमे।
- सरकारी कैरेक्टर सर्टिफिकेट में कंप्यूटर के जरिए एडिटिंग कर जालसाजी करने का आरोप।
- ’इंडिया न्यूज़’ चैनल में जिला संवाददाता के रूप में संभाला था कार्यभार।
- सीओ सदर यशपाल सिंह कर रहे हैं मामले की जांच; आरोपी पुलिस के सामने पेश होने से कर रहा है कतरा।
- जिले में सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करने वाले एक बड़े नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका।

हमीरपुर।
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक युवक पर पुलिस द्वारा जारी सरकारी चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) में कथित रूप से छेड़छाड़ (एडिटिंग) कर एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार चैनल में जिला संवाददाता (रिपोर्टर) की नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला उजागर होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
आपराधिक इतिहास छिपाकर हासिल की नौकरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी युवक की पहचान अभिषेक सिंह सानू के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अभिषेक के खिलाफ पूर्व में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2020 में एक महिला द्वारा उसके खिलाफ छेड़खानी का मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
नियमों के मुताबिक, किसी भी प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान या सरकारी/गैर-सरकारी नौकरी के लिए पुलिस वेरिफिकेशन और चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। आरोप है कि अभिषेक ने अपने आपराधिक इतिहास को छिपाने के लिए पुलिस द्वारा जारी मूल चरित्र प्रमाण पत्र में कंप्यूटर और डिजिटल टूल्स के माध्यम से कथित रूप से एडिटिंग की। प्रमाण पत्र में दर्ज अपराधों के विवरण को बदलकर उसने खुद को ‘दागरहित’ दिखाया और इसी फर्जी दस्तावेज के सहारे हाल ही में राष्ट्रीय समाचार चैनल ‘इंडिया न्यूज़’ में हमीरपुर जनपद से जिला संवाददाता के रूप में नियुक्ति पाकर कार्यभार भी संभाल लिया।
चर्चाओं का बाजार गर्म, मीडिया की साख पर सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद से पूरे जनपद के मीडिया और प्रशासनिक हल्कों में चर्चाओं का माहौल बेहद गर्म है। लोग सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या बड़े समाचार चैनलों के पास अब रिपोर्टर्स का इतना अकाल पड़ गया है कि वे बिना सही बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के छेड़खानी जैसे गंभीर मामलों के आरोपियों को फील्ड में अपनी माइक आईडी सौंप रहे हैं? इस घटना ने पत्रकारिता जगत की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिसिया जांच तेज, सीओ सदर संभाल रहे हैं कमान
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हमीरपुर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई है। इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच सीओ सदर यशपाल सिंह को सौंपी गई है। पुलिस सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि प्रथम दृष्टया यह सरकारी दस्तावेज में फोर्जरी (जालसाजी) का सीधा मामला है। पुलिस ने आरोपी अभिषेक सिंह सानू को अपना पक्ष रखने और जांच में सहयोग करने के लिए तलब किया था, लेकिन कानूनी शिकंजा कसता देख वह पुलिस के सामने पेश होने से लगातार कतरा रहा है और फरार चल रहा है।
क्या जिले में काम कर रहा है कोई ‘सिंडिकेट’?
सूत्रों का दावा है कि यह खेल सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। जिले में चर्चा है कि हमीरपुर में एक ऐसा पूरा नेटवर्क या सिंडिकेट सक्रिय हो सकता है, जो रुपयों के लालच में युवाओं को पुलिस सत्यापन (Police Verification) बाईपास करने और सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करने की ‘सुविधा’ जनसेवा केंद्रों या निजी कंप्यूटरों के माध्यम से प्रदान करता है।
सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल
चरित्र प्रमाण पत्र जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील सरकारी दस्तावेज में सेंधमारी होना केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह डिजिटल दौर में सरकारी सिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमीरपुर पुलिस इस कथित खेल के पीछे छिपे पूरे नेटवर्क और उसके आकाओं का पर्दाफाश कर पाएगी, या फिर यह पूरी जांच सिर्फ एक अदने से रिपोर्टर पर कार्रवाई करके ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? फिलहाल, पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच में जुटी हुई हैं।




Users Today : 190
Users Yesterday : 104