हाइलाइट्स:
- टाइम्स नाउ नवभारत की वाइस प्रेसिडेंट रूबिका लियाकत को मिल रही हैं अज्ञात नंबरों से धमकियां।
- पति नवेद कुरैशी की शिकायत पर नोएडा के सेक्टर-39 थाने में मामला दर्ज।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(4) के तहत की गई कार्रवाई।
- कॉल करने वाले रख रहे हैं पल-पल की गतिविधि पर नजर, परिवार में दहशत का माहौल।
नोएडा।
देश की जानी-मानी टीवी पत्रकार और ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ चैनल की वाइस प्रेसिडेंट व एग्जीक्यूटिव एडिटर रूबिका लियाकत को जान से मारने की धमकी मिलने का एक गंभीर मामला सामने आया है। अज्ञात उपद्रवियों द्वारा लगातार दी जा रही इन धमकियों के बाद उनके परिवार में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और दहशत का माहौल है। इस संबंध में रूबिका लियाकत के पति नवेद कुरैशी ने नोएडा के सेक्टर-39 थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस ने तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
महीने भर से आ रहे हैं धमकी भरे कॉल्स और मैसेज
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, यह सिलसिला पिछले करीब एक महीने से लगातार चल रहा है। रूबिका लियाकत के व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर अलग-अलग और अज्ञात नंबरों से लगातार धमकी भरे फोन कॉल्स और संदेश (मेसेज) आ रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कॉल करने वाले अज्ञात लोग उन्हें जान से मारने और अंजाम भुगतने की सीधी धमकियां दे रहे हैं। इन हरकतों की वजह से पत्रकार और उनका पूरा परिवार अत्यधिक मानसिक तनाव और भय के माहौल में जीने को मजबूर है।
लोकेशन ट्रैकिंग और स्टॉकिंग का गहरा अंदेशा
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि धमकी देने वाले आरोपी न सिर्फ फोन कर रहे हैं, बल्कि रूबिका लियाकत की दैनिक गतिविधियों (Daily Activities) पर भी पैनी नजर रख रहे हैं।
शिकायत के मुताबिक, आरोपी उनके आने-जाने के समय, उनके रूट और विभिन्न स्थानों पर उनकी मौजूदगी की सटीक जानकारी भी साझा कर रहे हैं। इससे परिवार को पक्का अंदेशा है कि रूबिका की बाकायदा स्टॉकिंग (निगरानी) की जा रही है या किसी आधुनिक डिजिटल माध्यम या स्पायवेयर से उनकी लाइव लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा है, जो उनकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।
साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक जांच की मांग
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शिकायतकर्ता नवेद कुरैशी ने नोएडा पुलिस से इस प्रकरण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच करने का अनुरोध किया है। पुलिस को सौंपे गए शिकायती पत्र में मांग की गई है कि:
- संदिग्ध मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR) की गहनता से जांच की जाए।
- आरोपियों की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए लोकेशन विश्लेषण (Location Analysis) और डिजिटल फॉरेंसिक टीम की मदद ली जाए।
- संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (Telecom Service Providers) से संपर्क कर डिजिटल साक्ष्यों को समय रहते सुरक्षित किया जाए, ताकि आरोपी अपनी पहचान न छुपा सकें।
पुलिस सुरक्षा और गश्त बढ़ाने की अपील
शिकायत में रूबिका लियाकत और उनके परिवार की जान-माल की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। परिवार ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा मुहैया कराने, उनके आवास और कार्यस्थल के आसपास नियमित पुलिस गश्त (Patrolling) बढ़ाने तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आश्वस्त किया है कि उनके पास उपलब्ध सभी कॉल लॉग्स, संदिग्ध नंबरों की सूची और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य वे जल्द ही जांच एजेंसी को सौंप देंगे।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस का बयान
नोएडा के सेक्टर-39 थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(4) [जो कि आपराधिक धमकी से संबंधित है] के तहत मामला पंजीकृत कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें उन नंबरों को ट्रेस करने में जुट गई हैं जिनसे कॉल आए थे। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन धमकियों के पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है या यह किसी की व्यक्तिगत रंजिश या शरारत का नतीजा है। फिलहाल, सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर तफ्तीश तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।




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