नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ते कनेक्टेड टीवी (CTV) और फ्री विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) बाजार को व्यवस्थित करने के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। इंडस्ट्री से जुड़े प्रमुख संगठन दर्शकों की संख्या (Audience Measurement) मापने और विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी संगठन, ‘इंडिया CTV एंड FAST काउंसिल’ (ICFC) बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया की पारंपरिक टेलीविजन रेटिंग लंबे समय से जारी नहीं हो रही है, जिससे ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापनदाताओं को विज्ञापनों के प्रदर्शन का आकलन करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या होगा ICFC का मुख्य उद्देश्य?
प्रस्तावित चार्टर के मुताबिक, ICFC का मकसद BARC की जगह लेना या अपना कोई कमर्शियल रेटिंग बिजनेस शुरू करना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शकों की संख्या मापने के लिए साझा परिभाषाएं, तकनीकी मानक और एक स्वतंत्र जांच व्यवस्था तैयार करना है। यह काउंसिल ब्रॉडकास्टर्स, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स, विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों और टेक कंपनियों को एक मंच पर लाएगी।
इस मसौदे को तैयार करने में जियोस्टार, जी, शेमारू, मैग्नाइट, द ट्रेड डेस्क, रन टीवी और क्लाउडटीवी जैसे कई प्रमुख संगठनों के सुझावों को शामिल किया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की TRP नीति 2026 में भी कनेक्टेड टीवी की माप को रेटिंग एजेंसी के पात्रता मानदंडों में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
इंडस्ट्री के सामने मुख्य चुनौतियां और काउंसिल की प्राथमिकताएं
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दर्शकों की माप के बिखरे हुए तरीके: पारंपरिक टीवी के विपरीत, डिजिटल और CTV प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों का डेटा अलग-अलग तरीकों से उपलब्ध होता है। इससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के बीच सीधी तुलना करना मुश्किल हो जाता है। ICFC इस समस्या को दूर करने के लिए देखने में बिताया गया समय, दर्शकों की संख्या (Impressions), विज्ञापन देखने की दर और क्लिक रेट जैसे मापदंडों के लिए एक जैसे नियम बनाएगी।
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स्वतंत्र एजेंसी के जरिए मापन: काउंसिल खुद डेटा जुटाने का काम नहीं करेगी, बल्कि तकनीकी जरूरतें तय करने के बाद किसी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत मौजूदा स्वतंत्र मापन एजेंसी का चयन करने में मदद करेगी। इसके लिए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK) या एपीआई (API) आधारित मॉडल पर विचार किया जा रहा है, जिस पर कड़े स्वतंत्र ऑडिट और निजता (Digital Personal Data Protection Rules, 2025) के नियम लागू होंगे।
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विज्ञापन धोखाधड़ी (Ad Fraud) पर रोक: CTV विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ाने और सप्लाई चेन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए मेटाडेटा और सिग्नलिंग के साझा मानक तैयार किए जाएंगे। काउंसिल इसके लिए इंटरएक्टिव ऐडवर्टाइजिंग ब्यूरो (IAB) जैसे वैश्विक संगठनों के मानकों को अपनाने पर जोर देगी।
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नीतिगत मामलों पर वकालत: यह काउंसिल डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स और डिजिटल कॉम्पिटिशन बिल जैसे नीतिगत विषयों पर सरकार और नियामकों के सामने इंडस्ट्री का पक्ष रखेगी। हालांकि, यह कंपनियों के बीच व्यावसायिक शर्तों या कीमतों को तय नहीं करेगी।
संचालन और फंडिंग की व्यवस्था
प्रस्तावित काउंसिल की संरचना में ब्रॉडकास्टर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, ब्रांड्स, विज्ञापन एजेंसियों और टेक कंपनियों को संतुलित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ताकि किसी एक का प्रभाव हावी न हो।
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इसे कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है।
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शुरुआती चरण में संस्थापक सदस्यों के वित्तीय योगदान से इसका खर्च उठाया जाएगा, जिसे बाद में सदस्यता शुल्क के जरिए चलाया जाएगा।
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चार्टर में यह स्पष्ट किया गया है कि अधिक वित्तीय योगदान देने वाले सदस्य को फैसलों में कोई अतिरिक्त अधिकार नहीं मिलेगा।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्वतंत्र ढांचा सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे विज्ञापनों में पारदर्शिता आएगी और विज्ञापनदाताओं को पारंपरिक टीवी और डिजिटल CTV पर किए गए निवेश का सटीक आकलन करने के लिए एक मजबूत आधार मिल सकेगा। हालांकि, इसकी सफलता पूरी इंडस्ट्री के सहयोग और आपसी भरोसे पर निर्भर करेगी।





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