नोएडा : देश के प्रमुख मीडिया हब नोएडा से हिंदी समाचार प्रसारण के क्षेत्र में एक नए राष्ट्रीय चैनल ‘Tv7 Bharat’ का भव्य शुभारंभ हो गया है। चैनल के चेयरमैन प्रवीण पाठक और प्रबंध निदेशक (MD) ज़ीनत पाठक के नेतृत्व में इस न्यूज़ चैनल को देश के अग्रणी डीटीएच व डिजिटल नेटवर्क्स पर एक साथ लाइव कर दिया गया है।
लॉन्च के साथ ही चैनल ने राष्ट्रीय, प्रादेशिक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता देने और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के संकल्प को दोहराया है।
प्रमुख डीटीएच और डिजिटल नेटवर्क्स पर उपलब्धता
दर्शकों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए चैनल को पहले ही दिन से देश के सबसे बड़े डीटीएच व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाइव उपलब्ध कराया गया है:
| प्लेटफॉर्म | चैनल नंबर (LCN) |
|---|---|
| टाटा स्काई (Tata Play) | 1137 |
| डिश टीवी (Dish TV) | 4011 |
| जियो टीवी (JioTV)
DD Direct |
1966
114 |
इसके अतिरिक्त, चैनल अन्य प्रमुख डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और क्षेत्रीय केबल नेटवर्क्स पर भी लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए 24 घंटे उपलब्ध रहेगा।
जनहित और निष्पक्ष पत्रकारिता पर जोर
Media4samachar से बातचीत करते हुए चेयरमैन प्रवीण पाठक और एमडी ज़ीनत पाठक ने चैनल की लॉन्चिंग पर खुशी जाहिर की और अपनी संपादकीय व तकनीकी टीम सहित देशभर के दर्शकों को बधाई दी।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि टीवी पत्रकारिता के वर्तमान दौर में ‘Tv7 Bharat’ सनसनीखेज खबरों से दूर रहकर जमीनी मुद्दों, सटीक विश्लेषण और पारदर्शी सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम करेगा। चैनल का उद्देश्य केवल सूचना देना ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की आवाज बनकर नीति-निर्माताओं तक उनकी समस्याएं पहुंचाना भी है।
संपादकीय दृष्टिकोण: जनसरोकार, निष्पक्षता और नए भारत की आवाज
सूचना क्रांति के इस दौर में जब खबरों की गति बिजली से भी तेज़ हो चुकी है, तब पत्रकारिता के मूल चरित्र—धैर्य, सत्यता और जनसरोकार—की रक्षा करना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और आवश्यक हो गया है। आज जब ‘Tv7 Bharat’ देश के प्रमुख डीटीएच और डिजिटल नेटवर्क्स के ज़रिये करोड़ों दर्शकों के ड्रॉइंग रूम और मोबाइल स्क्रीन्स तक पहुंच रहा है, तो यह केवल एक नए न्यूज़ चैनल का आगमन भर नहीं है; यह भारतीय टीवी पत्रकारिता में विश्वसनीयता और संतुलन को पुनः स्थापित करने का एक ठोस संकल्प है।
सनसनी नहीं, सरोकार की पत्रकारिता
वर्तमान दौर में टीआरपी की अंधी दौड़ ने खबरों की आत्मा को लहूलुहान किया है। स्क्रीन पर शोर, व्यक्तिगत आक्षेप और गैर-जरूरी उत्तेजना को अगर ‘न्यूज़’ मान लिया जाए, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ नाइंसाफी होगी। हमारा मानना है कि पत्रकारिता का धर्म किसी की वाहवाही लूटना या किसी को अनावश्यक कटघरे में खड़ा करना नहीं है, बल्कि तथ्य को उसके मूल स्वरूप में जनता के सामने रखना है।




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