नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 2 नवंबर 2026 को OTT प्लेटफॉर्म्स, डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स और इंटरनेट इंटरमीडियरीज के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। इसका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन कंटेंट के प्रकाशन में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 और उससे जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना है। मंत्रालय ने डिजिटल कंटेंट की सत्यता, संवेदनशीलता और संपादकीय जिम्मेदारी पर जोर देते हुए 9 प्रमुख क्षेत्रों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इस नई एडवाइजरी के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
1. पुरानी तस्वीरों और वीडियो के इस्तेमाल में पारदर्शिता अक्सर पुरानी सामग्री को वर्तमान घटनाओं से जोड़कर भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है। मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी पुरानी तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल करते समय उसकी मूल तारीख, स्थान और स्रोत (टाइमस्टैम्प सहित) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए ताकि जनता के बीच भ्रम न फैले।
2. आतंकवाद विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज पर रोक सुरक्षा बलों और आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, आतंकवाद विरोधी अभियानों की ‘लाइव कवरेज’ करने से मना किया गया है। मीडिया संस्थानों को निर्देश है कि वे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती, लोकेशन और रणनीति का खुलासा न करें। इसके बजाय, केवल अधिकृत अधिकारियों द्वारा दी गई ब्रीफिंग के आधार पर ही रिपोर्टिंग करें।
3. हिंसा और अपराध के दृश्यों को ब्लर करना अनिवार्य OTT प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पब्लिशर्स को निर्देश दिया गया है कि हिंसक, डरावने या विचलित करने वाले दृश्यों को ब्लर (Blur) या मास्क करके ही दिखाएं। थंबनेल, हेडलाइंस और कैप्शन भ्रामक या वास्तविकता से परे नहीं होने चाहिए, विशेषकर महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता बरतने को कहा गया है।
4. प्राकृतिक आपदाओं की सटीक रिपोर्टिंग आपदाओं और दुर्घटनाओं की कवरेज में केवल सत्यापित और पुष्ट जानकारी ही प्रकाशित की जानी चाहिए। बिना पुष्टि की खबरें या पुराने डरावने विजुअल्स दिखाने से लोगों में दहशत फैल सकती है। खबरों में तस्वीरों के साथ तारीख और समय का उल्लेख करना आवश्यक है।
5. भारत के प्रामाणिक नक्शे का उपयोग देश के नक्शे को लेकर एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि कंटेंट में केवल ‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग’ (Survey of India) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक और प्रामाणिक नक्शों का ही इस्तेमाल किया जाए।
6. सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना धार्मिक, भाषाई या अन्य समुदायों से जुड़ी खबरों में विशेष संपादकीय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बयानों, तस्वीरों या अनुवादों को सही संदर्भ में पेश किया जाना चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक दुश्मनी या हिंसा भड़कने की स्थिति पैदा न हो।
7. यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट के ‘निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ’ मामले के निर्देशों का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा है कि यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर नहीं होनी चाहिए। इसमें पीड़ित की तस्वीर, परिवार या रिहायशी इलाके की जानकारी शामिल है।
8. AI और डीपफेक (Deepfake) कंटेंट पर सख्ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या सिंथेटिक तरीके से तैयार किए गए वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों की सही तरीके से जांच करना अनिवार्य किया गया है। यदि ऐसा कंटेंट इस्तेमाल किया जाता है, तो दर्शकों को इसके बारे में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाना चाहिए ताकि वे इसे असली न समझें। इंटरमीडियरीज को IT Rules 2021 (नियम 3, 4 और 5) के तहत लागू अपनी जिम्मेदारी (Due Diligence) निभाने के निर्देश दिए गए हैं।
9. मजबूत एडिटोरियल रिव्यू सिस्टम मंत्रालय ने सभी प्लेटफॉर्म्स से कहा है कि वे अपने आंतरिक संपादकीय और कंटेंट रिव्यू सिस्टम (Content Review System) को मजबूत करें। कंटेंट से जुड़े कर्मचारियों को IT Act और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने के लिए वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाने चाहिए।
इस एडवाइजरी के माध्यम से मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि डिजिटल मीडिया पर प्रकाशन की स्वतंत्रता के साथ-साथ सत्यता, संदर्भ और कानूनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी उतना ही जरूरी है।




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