नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस महकमे में सोमवार को उस वक्त भारी उथल-पुथल मच गई, जब सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने अपने ही आला अधिकारियों के फैसले के खिलाफ पुलिस मुख्यालय (PHQ) का घेराव कर दिया। तीस हजारी कोर्ट की घटना के ठीक सात साल बाद यह दूसरा मौका है, जब दिल्ली पुलिस के जवान अपनी मांगों को लेकर और वकीलों की कार्यप्रणाली के विरोध में सड़कों पर उतरे। इस पूरे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व 2022 बैच के तेज-तर्रार दानिप्स (DANIPS) अधिकारी एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने किया।
इस घटनाक्रम के बाद गृह मंत्रालय द्वारा एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित किए जाने की खबर है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
इस पूरे विवाद और हाई-वोल्टेज ड्रामे की विस्तृत रिपोर्ट इस प्रकार है:
विवाद की जड़: वकीलों के दबाव में तबादला
यह पूरा विवाद शाहदरा जिले से शुरू हुआ। वकीलों के कथित दबाव में आकर आला अधिकारियों ने दानिप्स एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार का तबादला निष्क्रिय (इनएक्टिव) यूनिटों में कर दिया। इस फैसले से पुलिस महकमे में भारी रोष फैल गया। पुलिसकर्मियों का मानना था कि आला अधिकारियों ने अपने जवानों का साथ देने के बजाय वकीलों के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं।
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में एकजुट हुई पुलिस
तबादले से नाराज सैकड़ों पुलिसकर्मी सोमवार सुबह 9 बजे पुलिस मुख्यालय पहुंच गए। इस प्रदर्शन में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने जवानों का पुरजोर नेतृत्व किया। उनके जोशीले भाषणों और ‘पुलिस सम्मान व एकता’ के आह्वान ने पुलिसकर्मियों में जोश भर दिया। कई जवान वर्दी में तो कई सादे कपड़ों में मुख्यालय पहुंचे। बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों ने भी इसमें हिस्सा लिया और लगातार ‘पुलिस एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाए।
कौन हैं एसीपी मनस्वी वशिष्ठ? मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले मनस्वी वशिष्ठ 2022 बैच के दानिप्स अधिकारी हैं। सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने प्रतिष्ठित आईआईटी (IIT) खड़गपुर से पढ़ाई की है। उन्हें महकमे में एक दिलेर और तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
मुख्यालय पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती
स्थिति इतनी उग्र हो गई कि कई विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त नूपुर प्रसाद और डीसीपी सचिन शर्मा जैसे आला अधिकारियों के समझाने के बावजूद जवान नहीं माने। एसीपी मनस्वी का आत्मविश्वास और नेतृत्व देखकर वरिष्ठ अधिकारी भी हैरान रह गए। पुलिसकर्मियों की बढ़ती भीड़ और गुस्से को देखते हुए मुख्यालय की सुरक्षा कड़ी करनी पड़ी और अंततः अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया।
पुलिस कमिश्नर के साथ 45 मिनट चली ‘संपर्क सभा’
दोपहर करीब एक बजे आला अधिकारी एसीपी मनस्वी को पुलिस आयुक्त (CP) अनुराग कुमार से बातचीत के लिए अंदर ले गए, लेकिन उनके पीछे सैकड़ों पुलिसकर्मी भी मुख्यालय में दाखिल हो गए। इसके बाद करीब 45 मिनट तक ‘संपर्क सभा’ (संवाद) चली, जिसमें पुलिस आयुक्त सहित कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे।
पुलिस की 3 प्रमुख मांगें: संपर्क सभा में एसीपी मनस्वी ने 10 से अधिक मांगें रखीं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को किसी भी हाल में रद्द न किया जाए।
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दर्ज की गई एफआईआर (FIR) से बार काउंसिल के सदस्य का नाम न हटाया जाए।
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इस प्रदर्शन में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी पर अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई न हो।
एसीपी ने यहां तक कहा कि यदि विभाग को कोई सख्त कार्रवाई या निलंबन करना ही है, तो केवल उन पर किया जाए, अन्य जवानों को निशाना न बनाया जाए।
निलंबन की गाज और आगे की राह
पुलिस आयुक्त द्वारा मांगों पर आश्वासन दिए जाने के बावजूद जवानों का जमावड़ा खत्म नहीं हुआ और शाम पांच बजे भी कई पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर नारेबाजी करते रहे।
इस अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन और पुलिसकर्मियों को ‘मोबलाइज’ करने के कारण आला आईपीएस अधिकारी एसीपी मनस्वी से खासे नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने उन पर निलंबन की गाज गिरा दी है। वहीं महकमे में यह चर्चा भी जोरों पर है कि निलंबन के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ अपनी नौकरी से इस्तीफा दे सकते हैं। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच चल रहे लंबे तनाव को सतह पर ला दिया है।




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