नीचे पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार और 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क के मुख्य संपादक संजय शर्मा जी का बयान-
पहले नेशनल चैनल पर ताला जड़ा गया. फिर हमारी एंकर फ़िज़ा की इंस्टाग्राम रील से भी सरकार डर गई और उसे हटवा दिया गया.
और अब हद देखिए—आज सुबह से 4 PM का फेसबुक भी बंद करा दिया गया.
एक-एक करके हर प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया जा रहा है. सवाल ये है कि आखिर इतना डर किस बात का है. एक छोटे से वीडियो से, एक एंकर की आवाज़ से, या उस सच से जो जनता तक पहुंच रहा है.
सरकार को लगता है कि चैनल बंद करा दोगे तो आवाज़ बंद हो जाएगी. सोशल मीडिया हटवा दोगे तो सवाल खत्म हो जाएंगे. लेकिन ये उनकी सबसे बड़ी भूल है.
ये लड़ाई किसी एक प्लेटफॉर्म की नहीं है, ये लड़ाई सच और दबाव के बीच है. और इतिहास गवाह है—सच को जितना दबाया जाता है, वो उतनी ताकत से बाहर आता है.
हम ना पहले डरे थे, ना अब डरेंगे.
ना झुके थे, ना अब झुकेंगे.
चैनल बंद करोगे तो हम सड़कों पर बोलेंगे.
सड़कें बंद करोगे तो हर घर से आवाज़ उठेगी.
याद रखिए—आवाज़ को दबाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता हे.





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