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Success Story: 22 साल की उम्र में UPSC क्रैक कर बनीं IPS,कौन हैं नोएडा की पहली महिला DCP प्रीति यादव

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ग्रेजुएशन में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर जीता गोल्ड मेडल, पुलिसकर्मी की बेटी से IPS अधिकारी बनने तक का सफर; सहारनपुर में शुरू कराया था ‘बेलआउट-द पुलिस कैफे’

नोएडा। कहते हैं कि सफलता हासिल करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और मजबूत इच्छाशक्ति मायने रखती है। उत्तर प्रदेश कैडर की IPS अधिकारी प्रीति यादव की कहानी इस बात का उदाहरण है। पिता को पुलिस की वर्दी में ड्यूटी करते देखकर उनके मन में भी पुलिस अधिकारी बनने का सपना जागा। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और महज 22 साल की उम्र में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 466वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई। अब उन्हें गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में नोएडा जोन-1 की पुलिस उपायुक्त (DCP) नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ वह नोएडा जोन-1 की पहली महिला DCP बन गई हैं।

प्रीति यादव का सफर केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि की कहानी नहीं है, बल्कि पारिवारिक प्रेरणा, शिक्षा के प्रति समर्पण और लक्ष्य हासिल करने के जुनून की मिसाल भी है। पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन से लेकर पुलिस सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचने का उनका सफर युवाओं और खासकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक है।

पिता की वर्दी ने दिखाया पुलिस सेवा का रास्ता

प्रीति यादव की सफलता के पीछे उनके पिता की प्रेरणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके पिता ने पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल के रूप में नौकरी शुरू की थी और बाद में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) के पद तक पहुंचे।

पिता को वर्दी पहनकर ड्यूटी करते देख प्रीति के मन में पुलिस सेवा के प्रति सम्मान और इस क्षेत्र में आने की इच्छा पैदा हुई। उन्होंने अपने पिता से प्रेरणा लेकर खुद भी पुलिस अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित किया।

परिवार से मिली प्रेरणा को उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाया। आखिरकार उन्होंने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने सपने को साकार किया और IPS अधिकारी बनकर परिवार का नाम रोशन किया।

पढ़ाई में शुरू से रहीं मेधावी, 96 प्रतिशत अंक के साथ जीता गोल्ड मेडल

IPS प्रीति यादव का शैक्षणिक रिकॉर्ड शुरू से ही शानदार रहा है। उन्होंने 12वीं की परीक्षा ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम से 96.2 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने भूगोल विषय में स्नातक की पढ़ाई की।

ग्रेजुएशन के दौरान भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 96 प्रतिशत अंक हासिल किए और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों ने शुरू से ही उनकी प्रतिभा और पढ़ाई के प्रति गंभीरता को दर्शाया।

कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। बताया जाता है कि अपने लक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और UPSC की तैयारी में जुट गईं।

22 साल की उम्र में UPSC में हासिल की 466वीं रैंक

UPSC सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है। इसमें सफलता हासिल करने के लिए लंबे समय तक तैयारी, अनुशासन और निरंतर मेहनत की जरूरत होती है।

प्रीति यादव ने वर्ष 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में 466वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, उन्होंने महज 22 साल की उम्र में पहले प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। इसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया।

कम उम्र में हासिल की गई इस उपलब्धि ने उनके लिए पुलिस सेवा में आगे बढ़ने का रास्ता खोला। उनका यह सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सिविल सेवा में अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं।

सहारनपुर में ASP रहते हुए शुरू कराया ‘बेलआउट-द पुलिस कैफे’

IPS प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रीति यादव की शुरुआती तैनाती सहारनपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई। यहां उन्होंने पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक अनूठी पहल की।

सहारनपुर पुलिस लाइन के एक पुराने कैफे को नया रूप देकर उन्होंने ‘बेलआउट-द पुलिस कैफे’ शुरू कराया। इस पहल का उद्देश्य पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को एक ऐसा स्थान उपलब्ध कराना था, जहां वे सहज वातावरण में बातचीत कर सकें और आपसी जुड़ाव बढ़ा सकें।

इस पहल के जरिए पुलिस और जनता के बीच की औपचारिक दूरी कम करने तथा बेहतर संवाद का माहौल तैयार करने का प्रयास किया गया। पुलिसिंग के साथ सामाजिक जुड़ाव की यह पहल उनकी कार्यशैली के एक अलग पहलू को सामने लाती है।

महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए भी किया काम

प्रीति यादव ने अपनी पुलिस सेवा के दौरान महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। महिलाओं की सुरक्षा, उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता और पुलिस व्यवस्था में आम लोगों का भरोसा बढ़ाना उनके कार्यक्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलू रहे हैं।

उनकी कार्यशैली में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों के साथ-साथ पुलिस और समाज के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर देखने को मिला है।

नोएडा जोन-1 की पहली महिला DCP बनीं प्रीति यादव

गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में हुए प्रशासनिक बदलाव के तहत IPS अधिकारी प्रीति यादव को नोएडा जोन-1 का पुलिस उपायुक्त नियुक्त किया गया है। इस जिम्मेदारी के साथ उन्होंने एक नया मुकाम हासिल किया है। वह नोएडा जोन-1 की कमान संभालने वाली पहली महिला DCP बन गई हैं।

उनकी नियुक्ति पुलिस विभाग में महिला नेतृत्व और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नोएडा जोन-1 जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में DCP की जिम्मेदारी संभालना प्रशासनिक दृष्टि से काफी अहम है। उनके सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, पुलिस-जनता के बीच बेहतर समन्वय और नागरिकों की शिकायतों के प्रभावी निस्तारण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।

युवाओं के लिए प्रीति यादव की कहानी में क्या है सीख?

प्रीति यादव का सफर बताता है कि मजबूत इरादे और सही दिशा में की गई मेहनत से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने पिता की वर्दी से प्रेरणा लेकर पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखा और अपनी मेहनत के दम पर उसे पूरा किया।

उनकी उपलब्धियां दिखाती हैं कि परिवार से मिलने वाली प्रेरणा, पढ़ाई के प्रति लगन और लक्ष्य पर लगातार ध्यान बनाए रखना सफलता की राह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उनकी कहानी खास तौर पर उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों के बीच सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही यह उन बेटियों के लिए भी संदेश है कि वे अपने सपनों को सीमित न रखें और मेहनत के दम पर हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।

पिता की वर्दी से प्रेरणा लेकर IPS अधिकारी बनने और नोएडा जोन-1 की पहली महिला DCP बनने तक प्रीति यादव का सफर मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की प्रेरक मिसाल है।

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Author: media4samachar

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