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सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पत्रकार अमान रस्तोगी,दिल्ली पुलिस के खिलाफ अवमानना की मांग

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दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान कथित तौर पर दो बार हिरासत में लिए जाने के मामले में मोलिटिक्स के पत्रकार अमान रस्तोगी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी अवमानना याचिका में दिल्ली पुलिस पर शीर्ष अदालत के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला और अवमानना याचिका

याचिकाकर्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने से किसी भी स्थिति में नहीं रोका जाना चाहिए। इसके बावजूद, उन्हें ड्यूटी के दौरान हिरासत में लिया गया। इस याचिका में जिन प्रमुख अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है, उनमें शामिल हैं:

  • केंद्रीय गृह सचिव

  • दिल्ली पुलिस आयुक्त

  • नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी)

  • कमला मार्केट थाने के एसएचओ

रस्तोगी ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।

पुलिस आयुक्त से व्यक्तिगत हलफनामे की मांग

याचिका में दिल्ली पुलिस आयुक्त से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि उन्हें हिरासत में लेने का कानूनी आधार क्या था। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित जानकारियों की भी मांग की गई है:

  • हिरासत में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम और उनके बेल्ट नंबर।

  • दैनिक डायरी (DD/GD) एंट्री का विवरण।

  • हिरासत या जब्ती का मेमो (Memo) तैयार न किए जाने के कारण।

  • मिंटो रोड इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत किसी निषेधाज्ञा के लागू होने की आधिकारिक स्थिति।

घटनाओं का सिलसिलेवार विवरण

  1. रविवार की घटना: रस्तोगी को पहली बार रविवार को कनॉट प्लेस के पास विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करते समय हिरासत में लिया गया, जबकि उस समय उनकी प्रेस आईडी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। आरोप है कि जब उन्होंने प्रदर्शन के दौरान एक 16 वर्षीय किशोर सहित आम नागरिकों को हिरासत में लिए जाने पर पुलिस से सवाल किया, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की और उन्हें डीटीसी बस में बैठा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा हुआ था, जिसमें वे बस की खिड़की से अपनी प्रेस आईडी दिखाते नजर आए थे।

  2. सोमवार की घटना: याचिका के अनुसार, सोमवार को दोपहर करीब 3:30 बजे मिंटो रोड के पास उन्हें दोबारा हिरासत में लिया गया। इस दौरान उनकी प्रेस आईडी कथित तौर पर नाले में फेंक दी गई। याचिका में मुख्य रूप से यह रेखांकित किया गया है कि दोनों ही मौकों पर पुलिस द्वारा कोई हिरासत मेमो तैयार नहीं किया गया।

मीडिया संगठनों की प्रतिक्रिया और व्यापक चिंता

इस मामले के सामने आने के बाद अन्य पत्रकार संगठनों ने भी कड़ा रुख अपनाया है। नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) ने विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रही महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अलग से याचिका दायर की है। वहीं, फ्री स्पीच कलेक्टिव ने भी पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के मामलों में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।

यह पूरा घटनाक्रम देश में प्रेस की स्वतंत्रता, फील्ड में काम कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों पर नए सिरे से बहस छेड़ रहा है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि पत्रकारों को उनके कर्तव्यों से रोकने और तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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Author: media4samachar

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