नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने 7 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न/रेप के मामले में ऐतिहासिक और संवेदनशील फैसला सुनाते हुए दोषी को जीवनभर जेल में रहने (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। यह मामला न्याय व्यवस्था में कड़े न्याय के साथ-साथ अदालती संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल बन गया है, जिसकी तारीफ दिल्ली हाईकोर्ट ने भी की है।
’अंकल को तब तक जेल में रखो जब तक बूढ़ा न हो जाए’
घटना 23 जुलाई 2023 की है। पीड़िता की उम्र उस वक्त महज 7 साल थी। आरोपी बच्ची का परिचित था और बच्ची उसे ‘अंकल’ कहकर बुलाती थी। जब मामला कोर्ट पहुंचा, तो मासूम बच्ची ने अपनी आपबीती सुनाते हुए अदालत से कहा था— “अंकल को तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए।”
जज का भावुक संदेश: “तुम्हारी हिम्मत याद रखेंगे”
तीन साल तक चली अदालती कार्यवाही के बाद, 20 मई 2026 को ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए ताउम्र जेल की सजा सुनाई। फैसले के साथ ही जज ने अब 10 साल की हो चुकी बच्ची के लिए एक बेहद संवेदनशील और भावुक संदेश भी लिखा:
“हम तुम्हारा बचपन तो नहीं लौटा सकते, लेकिन जिसने तुम्हें चोट पहुंचाई, वह अब कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएगा। हम तुम्हारी हिम्मत को हमेशा याद रखेंगे।”
अदालत ने पीड़ित बच्ची के पुनर्वास के लिए ₹10.50 लाख का मुआवजा भी तय किया।
हाईकोर्ट का रुख: सजा बरकरार, संदेश को बताया ‘नोट ऑफ करेज’
ट्रायल कोर्ट के इस फैसले और सजा के खिलाफ दोषी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, 22 सितंबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की जज द्वारा बच्ची को लिखे गए संदेश की सराहना करते हुए इसे ‘नोट ऑफ करेज’ (साहस का संदेश) करार दिया। साथ ही नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को निर्देश दिया कि इस संदेश को बच्ची और उसके परिवार तक आधिकारिक रूप से पहुंचाया जाए। अदालत ने मुआवजे की स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है और मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 तय की है।



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