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प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल रिहाई के बाद बोले पुलिस ने मेरा थर्ड डिग्री टॉर्चर किया व परेशान किया

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नई दिल्ली: हिंदी खबर के प्रधान संपादक और लिविंग इंडिया न्यूज से जुड़े पत्रकार अतुल अग्रवाल की पुलिस हिरासत से रिहाई के बाद एक नया और गंभीर वीडियो सामने आया है। साढ़े चार मिनट से अधिक लंबे इस वीडियो में अतुल अग्रवाल ने हरियाणा पुलिस की हिरासत में अमानवीय व्यवहार और कथित प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सत्ता बेहद निष्ठुर और बेरहम होती है, लेकिन उन्होंने या उनकी टीम ने पत्रकारिता के मानदंडों से कोई समझौता नहीं किया है।

घर से उठाना और थर्ड डिग्री टॉर्चर के आरोप

वीडियो में अतुल अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके घर से उठाया गया और उनकी इज्जत व अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा, “मेरा थर्ड डिग्री टॉर्चर हुआ। लोहे का बेलन चलाया गया। मेरे पूरे पैर के पंजे सूजे हुए हैं। तीन-तीन बार मुझे नंगा होना पड़ा।”

इसके साथ ही उन्होंने अपनी रिपोर्टर नीतू का विशेष रूप से जिक्र किया और उनके काम पर गर्व जताया। नीतू वही रिपोर्टर हैं जिन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गृह जिले कुरुक्षेत्र के लाडवा क्षेत्र में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ रिपोर्टिंग की थी।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद कुरुक्षेत्र के लाडवा क्षेत्र में चल रहे कथित नशे के कारोबार से जुड़ी रिपोर्टिंग से शुरू हुआ था। ‘लिविंग इंडिया न्यूज’ चैनल ने 7 अक्टूबर को नशे के मुद्दे पर एक स्टिंग और रिपोर्ट प्रसारित की थी।

इसके बाद, 10 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चैनल के प्रबंध निदेशक अतुल अग्रवाल, संपादक सौरभ उपाध्याय, पत्रकार नीतू, एंकर सुदेश नैन मोर और ड्राइवर लवप्रीत को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का आरोप था कि चैनल ने करीब छह महीने पुराने एक वीडियो को हालिया स्टिंग ऑपरेशन के रूप में प्रसारित किया था, और एक शिकायतकर्ता ने वीडियो के गलत इस्तेमाल तथा कथित ब्लैकमेलिंग की शिकायत दर्ज कराई थी।

अदालत से मिली नियमित जमानत

मामले की सुनवाई करते हुए 15 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने अतुल अग्रवाल समेत सभी पांच आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं मंजूर कर लीं। अदालत ने पुलिस की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया जिसमें अतुल अग्रवाल के लिए आठ दिन की अतिरिक्त रिमांड की मांग की गई थी। जमानत मंजूर होने के बाद जेल से रिहाई की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर बड़े सवाल

यह पूरा प्रकरण मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है और दो अहम सवाल खड़े करता है:

  1. पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता: क्या समाज के संवेदनशील मुद्दों (जैसे नशाखोरी) को उजागर करने वाले पत्रकारों को इस प्रकार की प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा?

  2. सामग्री की सत्यता और जवाबदेही: मीडिया में प्रसारित होने वाली सामग्री और वीडियो की प्रमाणिकता को लेकर जो आरोप पुलिस ने लगाए हैं, उनकी पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित हो?

फिलहाल, अतुल अग्रवाल द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर पुलिस पक्ष और पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

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Author: media4samachar

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