तहलका (Tehelka) मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को 2013 के गोवा दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उनकी 10 साल की सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही उन्हें फिलहाल जेल से कोई राहत नहीं मिल सकी है।
अदालत की बेंच और सुनवाई के मुख्य बिंदु
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पीठ: इस मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ कर रही थी।
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साक्ष्यों पर विचार: अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद ईमेल, संदेशों (मैसेजेस) और अन्य अहम साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद इसे सजा निलंबित करने के लिए उपयुक्त मामला नहीं माना।
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प्रमुख वकील: तेजपाल की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने की, जबकि गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मजबूती से पक्ष रखा।
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दीवाली की राहत से भी इनकार: सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दीवाली के मौके पर तरुण तेजपाल को घर जाने के लिए अंतरिम रिहाई देने की मांग की थी, जिसे गोवा सरकार के विरोध के बाद अदालत ने ठुकरा दिया था।
मामला क्या है और कब क्या हुआ? (संक्षिप्त घटनाक्रम)
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नवंबर 2013: गोवा में तहलका मैगजीन के एक कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में जूनियर सहकर्मी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। इसके बाद तरुण तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था।
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मई 2021 (ट्रायल कोर्ट से राहत): गोवा के मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत का मानना था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
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6 अगस्त 2026 (बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला): बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया और सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
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14 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तरुण तेजपाल ने मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा के कोलवाले स्थित केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।
वर्तमान में तरुण तेजपाल की दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली मुख्य अपील सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जिस पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।





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