नई दिल्ली/नोएडा: डिजिटल मीडिया में महज़ कुछ व्यूज़ और हिट्स पाने की जल्दबाज़ी किस कदर भारी पड़ सकती है, इसका एक बड़ा और ताज़ा उदाहरण एबीपी न्यूज़ (ABP News) से सामने आया है। लोक गायिका नेहा राठौर के ख़िलाफ़ बिना तथ्यों की जांच किए ग़लत और भ्रामक खबर चलाने का बड़ा ख़ामियाज़ा तीन मीडियाकर्मियों को अपनी नौकरी गंवाकर चुकाना पड़ा है। चैनल प्रबंधन के सख्त रुख के बाद, एबीपी न्यूज़ के डिजिटल सेक्शन से एक महिला पत्रकार समेत ‘टॉप टू बॉटम’ तीन लोगों को टर्मिनेशन ऑर्डर थमा दिया गया है।
Media4samachar ने सबसे पहले इन तीनों के नौकरी जाने की खबर प्रकाशित किया था जिनमें अब फाइनल निर्णय एबीपी प्रबंधन ने ले लिया हैं
पहले गाज गिरी Shift incharge digital videos पर। इन महोदय द्वारा भारी चूक की गई। इन्होंने ग़लत खबर और फेक वीडियो को पब्लिश होने दिया। इनके द्वारा ओके किए जाने के बाद ही वीडियो पब्लिश हुआ। इनको भी टर्मिनेट कर दिया गया है।
संपादकीय जांच में पाए गए दोषी, डिजिटल हेड पर गिरी गाज फेक न्यूज़ प्रसारित होने के बाद प्रबंधन ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और संपादक द्वारा एक आंतरिक जांच बैठाई गई। इस जांच में तीन कर्मचारियों की सीधे तौर पर घोर लापरवाही सामने आई। इसमें सर्वप्रथम ‘ABP News Videos Digital Head’ को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें पद से हटा दिया गया है। हालांकि, उनके मीडिया करियर को ध्यान में रखते हुए फिलहाल नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। प्रोटोकॉल के तहत, किसी भी वीडियो को पब्लिश करने से पहले तथ्यों को परखने और अंतिम मंज़ूरी देने की प्रमुख जिम्मेदारी डिजिटल हेड की ही होती है।
यूं हुई चूक: सोशल मीडिया पोस्ट को बिना ‘फैक्ट चेक’ किया पब्लिश इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी और शुरुआती लापरवाही ‘YouTube Shorts Shift Incharge’ के पद पर कार्यरत एक महिला कर्मचारी की ओर से हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिफ्ट इंचार्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर वायरल हो रहे एक प्रोपेगंडा और फ़र्ज़ी पोस्ट के झांसे में आकर उसे सच मान लिया। खबर को सबसे पहले ब्रेक करने और हिट्स बटोरने के चक्कर में बिना किसी कन्फर्मेशन, बिना क्रॉस-चेक किए और बिना फैक्ट चेक के ही वीडियो पब्लिश कर दिया गया।
वरिष्ठों ने भी नहीं उठाई क्रॉस-चेक की ज़हमत हैरानी की बात यह रही कि शिफ्ट इंचार्ज के ऊपर बैठे दो वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस खबर को वेरीफाई करने की ज़हमत नहीं उठाई। उन्होंने आंख मूंदकर यह मान लिया कि अगर खबर तैयार होकर आई है, तो वह सही ही होगी। निचले स्तर की इस गलती को पकड़ने के बजाय, ऊपर के दोनों ज़िम्मेदार लोग भी इस प्रोपेगंडा न्यूज़ को सच मान बैठे।
मीडिया जगत के लिए एक बड़ा सबक इस बड़ी लापरवाही पर प्रबंधन ने ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए डिजिटल डेस्क के टॉप से लेकर बॉटम तक, तीनों ज़िम्मेदार लोगों को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया है।
यह घटना न्यूज़ चैनलों और डिजिटल वेब पोर्टल्स में कार्यरत तमाम पत्रकारों और डेस्क प्रभारियों के लिए एक कड़ा सबक है। यह साफ तौर पर चेतावनी देता है कि सोशल मीडिया पर तैर रही किसी भी भ्रामक खबर या प्रोपेगंडा को सच मानकर पब्लिश करने से बचना चाहिए। पत्रकारिता के मूल सिद्धांत यानी ‘फैक्ट चेकिंग’ और ‘क्रॉस वेरिफिकेशन’ से समझौता करने का अंजाम करियर पर भारी पड़ सकता है।



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