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‘डिजिटल रैंकिंग’ के दबाव में तीन कर्मचारियों की छंटनी,मुख्य रणनीतिकार का पद सुरक्षित

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विशेष रिपोर्ट- अभिषेक उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार)

एक प्रमुख न्यूज़ चैनल के डिजिटल विंग में मचे ताज़ा बवाल ने मीडिया जगत की अंदरूनी राजनीति और व्यूज़ की अंधी दौड़ की पोल खोल कर रख दी है। विवाद में घिरने के बाद चैनल ने भले ही तीन कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर यह जताने की कोशिश की है कि उन्होंने सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस पूरे ‘फर्ज़ीवाड़े’ का असली मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि डिजिटल विभाग का सर्वेसर्वा ‘डिसूजा’ है।

सूत्रों के हवाले से जो ‘इनसाइड स्टोरी’ सामने आई है, वह डिजिटल पत्रकारिता में गिरते स्तर और मैनेजमेंट की तानाशाही का सीधा उदाहरण है:

असली ज़िम्मेदार कौन: डिसूजा या निचले कर्मचारी? चैनल ने जिन तीन कर्मचारियों की छुट्टी की है, वे दरअसल सिर्फ मोहरे थे। चैनल की अंदरूनी संरचना के अनुसार, ये तीनों कर्मचारी ‘गोस्वामी’ के अधीन काम करते थे, और गोस्वामी सीधे ‘डिसूजा’ को रिपोर्ट करते थे। पूर्व डिजिटल हेड ‘तुषार’ के जाने के बाद से डिसूजा ही डिजिटल विंग का अघोषित बॉस बना हुआ है और वह चैनल के मालिकों का बेहद करीबी माना जाता है।

दिन में तीन बार फोन और ‘क्लिकबेट’ का दबाव चैनल के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सनसनीखेज और भ्रामक खबरों का जो खेल चल रहा था, वह निचले कर्मचारियों की नहीं, बल्कि टॉप मैनेजमेंट की उपज थी। सूत्रों के मुताबिक, डिसूजा रोज़ाना दिन में कम से कम तीन बार गोस्वामी को फोन करके दबाव बनाता था। उसका सीधा सवाल होता था- “डिजिटल रैंकिंग नंबर 2 या नंबर 3 पर क्यों खिसक गई?”

इसी रैंकिंग को सुधारने के लिए डिसूजा की तरफ से स्पष्ट आदेश थे कि खबरों में जमकर ‘क्लिकबेट’ (Clickbait) का इस्तेमाल किया जाए। “एक से बढ़कर एक तड़कती-भड़कती हेडलाइन बनाओ और ख़बर को मसालेदार बनाओ”—ये वो निर्देश थे जिनका पालन न करने पर नौकरी जाने का खतरा रहता था।

अनुभव को दरकिनार कर इंटर्नों के भरोसे चला चैनल व्यूज़ बटोरने की इस आक्रामक रणनीति को लागू करने के लिए डिसूजा ने एक खास चाल चली। उसने चैनल से अनुभवी और उसूलों वाले पत्रकारों की छंटनी कर दी। उनकी जगह कम वेतन वाले इंटर्नों (Interns) के हाथ में पूरे डिजिटल की कमान सौंप दी गई। अनुभवहीन होने के कारण इन इंटर्नों ने बिना किसी सवाल के मैनेजमेंट के ‘मसालेदार’ एजेंडे को आगे बढ़ाया।

बचा ली गई ‘गद्दी’ जब चैनल का यह घटिया खेल पकड़ा गया और ब्रांड की साख पर भयावह तरीके से आंच आने लगी, तो मैनेजमेंट ने तुरंत ‘डैमेज कंट्रोल’ शुरू कर दिया। लेकिन इस कार्रवाई में न्याय नहीं, बल्कि राजनीति दिखी। मालिकों के खासमखास होने का पूरा फायदा डिसूजा को मिला। विवाद का सारा ठीकरा उन मामूली कर्मचारियों पर फोड़ दिया गया जो केवल आदेश का पालन कर रहे थे।

नतीजतन, तीन लोगों की नौकरी छीन ली गई, जबकि पूरे सिस्टम को दूषित करने वाले डिसूजा की गद्दी पूरी तरह सुरक्षित है। यह पूरी घटना इस बात का प्रमाण है कि व्यूज़ और टीआरपी की रेस में बड़े अधिकारी मुनाफा और पद दोनों बचा लेते हैं, जबकि गाज हमेशा निचले दर्जे के कर्मचारियों पर ही गिरती है।

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Author: media4samachar

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