कानपुर: नगर पुलिस ने अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए किराए के कमरों में नकली नोट छापने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 2,04,650 रुपये के नकली नोट, कलर प्रिंटर और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली विशेष पेपरशीट बरामद की है। आरोपी पिछले चार महीनों से कानपुर और आसपास के जिलों में नकली नोटों को धड़ल्ले से खपा रहे थे।
ट्रेनों की चोरियों से शुरू हुआ अपराध का सफर
अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय-अपराध संकल्प शर्मा और एडीसीपी ऑपरेशंस सुधाकर रामटेके ने प्रेसवार्ता में पूरे मामले का खुलासा किया। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का सरगना उन्नाव के बांगरमऊ (रघुवरखेड़ा) का रहने वाला शेर बहादुर उर्फ शेर सिंह उर्फ वकील है, जो केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है। शेर बहादुर मूल रूप से ट्रेनों में चोरी और गांजा तस्करी का काम करता था।
ट्रेनों में सफर के दौरान उसकी मुलाकात उरई (गडर बिनौरा) के सोमिल गुप्ता और बलरामपुर (खलवा) के रोशन अली से हुई। तीनों ने मिलकर पहले चोरी और मादक पदार्थों की तस्करी शुरू की। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक अन्य व्यक्ति से हुई, जिसने उन्हें विशेष पेपरशीट और प्रिंटर के जरिए नकली नोट छापने का तरीका सिखाया। इसके बाद आरोपियों ने शातिर तरीके से इस अवैध धंधे को ही अपना मुख्य कारोबार बना लिया।
हर महीने बदलते थे ठिकाना, खुद को बताते थे फैक्ट्रीकर्मी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पुलिस और स्थानीय लोगों की नजर से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया हुआ था। वे अलग-अलग इलाकों में किराए पर कमरे लेते थे और वहां कलर प्रिंटर की मदद से 50, 100 और 500 रुपये के असली नोटों को स्कैन करके नकली नोट छापते थे।
पकड़े जाने के डर से वे हर महीने अपना कमरा बदल देते थे। मकान मालिकों को वे खुद को फैक्ट्री का मजदूर बताते थे और कहते थे कि उनका परिवार अभी गांव में है। कमरे में वे ज्यादा सामान नहीं रखते थे—सिर्फ एक चटाई, चादर, प्रिंटर, इंक, कागज और कुछ बर्तन रखते थे। कई बार रात बिताने के लिए वे रेलवे स्टेशन या रैन बसेरों का सहारा लेते थे।
ऐसे खपाते थे बाजार में नकली नोट
यह गिरोह नकली नोटों को बाजार में चलाने के लिए दो अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करता था:
- बल्क डील: सरगना शेर बहादुर अन्य सहयोगियों को 10,000 रुपये के नकली नोट मात्र 3,000 रुपये के असली नोटों में बेच देता था, जिससे वे तुरंत मोटी रकम कमा लेते थे।
- फुटकर बाजार: आरोपी खुद भीड़भाड़ वाली सब्जी मंडियों, रेलवे स्टेशन के पास की दुकानों, कम पढ़े-लिखे दुकानदारों और देशी शराब के ठेकों पर जाते थे। वहां सामान खरीदने के बाद वे फुटकर पैसे मांगने के बहाने दुकानदारों को नकली नोट थमाकर मौके से रफूचक्कर हो जाते थे।
गिरोह 500 रुपये के नोट कम छापता था क्योंकि लोग बड़े नोटों की ज्यादा बारीकी से जांच करते हैं, इसलिए उनका मुख्य फोकस 50 और 100 रुपये के नोटों पर अधिक रहता था।
भारी-भरकम आपराधिक इतिहास
पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों का लंबा चौड़ा आपराधिक इतिहास रहा है:
- सरगना शेर बहादुर: इस पर वर्ष 2010 में उन्नाव कोतवाली में अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का गंभीर मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके अलावा उस पर गैंगस्टर एक्ट और जीआरपी में चोरी के मामले दर्ज हैं।
- रोशन अली: इस पर कलक्टरगंज थाने समेत विभिन्न थानों में चोरी और एनडीपीएस (मादक पदार्थ तस्करी) अधिनियम के तहत 5 मुकदमे दर्ज हैं।
- सोमिल गुप्ता: इस शातिर के खिलाफ भी चोरी और अन्य मामलों में कई मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस ने रेलबाजार थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं, नोट छापने का तरीका सिखाने वाले चौथे फरार आरोपी की तलाश में पुलिस की टीमें राजस्थान के एक जिले के लिए रवाना हो चुकी हैं, जिसे जल्द ही गिरफ्तार किए जाने का दावा किया जा रहा है।



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