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प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल समेत महिला संपादक व अन्य को मिल गई जमानत

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कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कथित फर्जी वीडियो प्रसारण और जबरन वसूली से जुड़े चर्चित मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मोहिनी की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ‘लिविंग इंडिया’ न्यूज़ चैनल व हिन्दी खबर चैनल के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल, एडिटर सौरभ उपाध्याय और महिला संपादक सुदेश नैन व चैनल से जुड़े अन्य कर्मियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस द्वारा मांगी गई आठ दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड की अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।

​अदालत का रुख और धाराओं पर टिप्पणी

​मीडिया4समाचार को विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में लगाई गई भारतीय न्याय संहिता की धारा 338 लागू नहीं होती। अदालत के अनुसार, यह धारा किसी मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत अथवा ऐसे ही कानूनी दस्तावेजों में जालसाजी करने पर लागू होती है, जबकि यह पूरा मामला एक वीडियो सामग्री के प्रसारण से जुड़ा है। अदालत ने पाया कि मामले में लगाई गई शेष सभी धाराएं कानूनन जमानती हैं।

​साजिश से जुड़ी धारा 61(2) पर अदालत ने साफ किया कि षड्यंत्र की प्रकृति मूल अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है। चूंकि मूल आरोप जमानती श्रेणी के हैं, इसलिए साजिश की धारा भी जमानती ही मानी जाएगी। अदालत ने शीर्ष अदालत के सतेंदर कुमार अंतिल बनाम सीबीआई निर्णय की नजीर देते हुए कहा कि जमानत सामान्य नियम है और जेल अपवाद।

​गिरफ्तारी और रिमांड पर पुलिस को झटका

​थाना थानेसर सिटी में दर्ज एफआईआर संख्या 235 की जांच कर रही पुलिस ने चंडीगढ़ दफ्तर से उपकरण व दस्तावेज तथा मुंबई से लैपटॉप बरामद करने के आधार पर अतुल अग्रवाल और मनीष अग्रवाल की आठ-आठ दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी। अदालत ने पुलिस की इस मांग को खारिज कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पंकज बंसल मामले के दिशानिर्देशों का पालन कराते हुए जांच अधिकारी को दोनों आरोपियों को गिरफ्तारी का लिखित आधार और अरेस्ट मेमो उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

​जमानत की शर्तें और वर्तमान स्थिति

​अदालत ने सभी आरोपियों को ₹50,000 का निजी मुचलका और इतनी ही राशि का एक जमानती प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसके अलावा बिना अदालती अनुमति के देश न छोड़ने और गवाहों को प्रभावित न करने जैसी सामान्य शर्तें भी लगाई गईं।

​आदेश के तुरंत बाद केवल सुदेश नैन का बेल बॉन्ड भरा जा सका, जिससे उनका रिहाई वारंट जारी हो गया। अतुल अग्रवाल और मनीष अग्रवाल के बेल बॉन्ड उस समय तक जमा नहीं हो सके थे, जिसके चलते उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और अगली पेशी 23 अक्टूबर तय की गई है। दोनों आरोपियों के बेल बॉन्ड जमा होते ही वे भी जेल से रिहा हो सकेंगे।

​क्या था पूरा मामला

​कुरुक्षेत्र निवासी एक कार सेल्समैन नवीन सैनी ने आरोप लगाया था कि एक परिचित के कहने पर उन्होंने नशे की लत का एक काल्पनिक वीडियो अभिनय के तौर पर बनाया था। बाद में चैनल ने इस वीडियो को असली बताकर प्रसारित कर दिया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि वीडियो हटाने के एवज में 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई और पैसे न देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि यह हरियाणा में नशे की गंभीर समस्या को उजागर करने वाला एक सांकेतिक चित्रण था, जिसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से तोड़-मरोड़ कर पत्रकारों की आवाज दबाने और प्रेस की स्वतंत्रता को बाधित करने के लिए यह झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है।

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Author: media4samachar

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