कुरुक्षेत्र हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कथित वीडियो प्रसारण और वसूली से जुड़े एक मामले में लिविंग इंडिया न्यूज़ चैनल के मालिक अतुल अग्रवाल सहित छह लोगों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। कुरुक्षेत्र की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मोहिनी की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को जमानत दे दी। हालांकि, बेल बॉन्ड पेश न होने के कारण चैनल मालिक अतुल अग्रवाल और मनीष अग्रवाल को फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहना होगा। अदालत ने उन्हें 23 अक्टूबर 2026 को अगली पेशी पर तलब किया है।
अदालत का फैसला और जमानत की वजह
अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को इस मामले में सुनवाई करते हुए अतुल अग्रवाल, चैनल के एडिटर सौरभ उपाध्याय, इंटर्न रिपोर्टर सुदेश नैन, ड्राइवर लवप्रीत और नीतू की नियमित जमानत याचिकाएं मंजूर कीं। वहीं, चैनल से जुड़े मनीष अग्रवाल की ओर से जमानत याचिका दाखिल नहीं की गई थी, लेकिन अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ दर्ज सभी अपराध जमानती हैं। अदालत ने यह भी माना कि मामले में बीएनएस की धारा 338 लागू नहीं होती, जिसके आधार पर मनीष अग्रवाल को भी स्वतः जमानत का हकदार ठहराया गया।
दर्ज धाराएं और बचाव पक्ष की दलीलें
यह पूरा मामला भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं 308, 336, 338, 339, 351 और आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने इसमें साजिश से जुड़ी धारा 61 भी जोड़ी और आईटी एक्ट की धारा 66E के स्थान पर 65 और 66 लागू कीं।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार सरसा और गजे सिंह ने दलील दी कि सभी आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। प्रसारित वीडियो पूरी तरह प्रामाणिक था और इसका मकसद केवल समाज व कानून लागू करने वाली एजेंसियों को नशे के खतरे के प्रति जागरूक करना था। वकीलों ने स्पष्ट किया कि यह खबर हरियाणा में युवाओं के बीच नशे की समस्या पर आधारित थी और वीडियो को केवल एक प्रतीकात्मक चित्रण के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन और कानूनी प्रक्रिया
अदालत ने गिरफ्तारी के आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पंकज बंसल मामले के फैसले का हवाला दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि अतुल अग्रवाल और मनीष अग्रवाल को गिरफ्तारी के लिखित आधार और अरेस्ट मेमो तुरंत सौंपे जाएं। आदेश के अनुपालन में ये सभी जरूरी दस्तावेज कोर्ट परिसर में ही बचाव पक्ष के वकील को सौंप दिए गए। इसके साथ ही, बचाव पक्ष की ओर से परिजनों और वकील से 30 मिनट की मुलाकात की जो मांग रखी गई थी, उसे अदालत ने जमानत मंजूर हो जाने के आधार पर निरर्थक करार दिया।
रिहाई की स्थिति और अदालत की शर्तें
अदालत के आदेश के दिन केवल इंटर्न रिपोर्टर सुदेश नैन की ओर से बेल बॉन्ड और मुचलका जमा कराया गया, जिसके चलते उनका रिहाई वारंट तुरंत जारी कर दिया गया। अन्य आरोपियों, जिनमें अतुल अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, सौरभ उपाध्याय, लवप्रीत और नीतू शामिल हैं, के बेल बॉन्ड उस समय जमा नहीं हो सके थे। इस वजह से अतुल और मनीष अग्रवाल को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बेल बॉन्ड और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही इनकी रिहाई भी संभव हो सकेगी।
अदालत ने सभी आरोपियों को जमानत देते हुए कड़ी शर्तें भी तय की हैं:
- सभी आरोपी अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे।
- मामले की हर निर्धारित तारीख पर अदालत के समक्ष पेश होंगे।
- जमानत अवधि के दौरान इस तरह के किसी भी अपराध को नहीं दोहराएंगे।
- गवाहों को डराने, धमकाने, प्रभावित करने या मामले के सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेंगे।





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