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कृष्ण कांत-
देश हो या विदेश, फील्ड पर जाने वाले पत्रकार की पिटाई या गाली गलौज से दुख होता है। यह नहीं होना चाहिए। जनता के विरोध में खड़े होने वाले असल षड्यंत्रकारी चैनल के मालिक और संपादक हैं।
लेकिन एजेंडा रिपोर्टिंग कर रहा फील्ड रिपोर्टर जनता को दिखता है और वह आसान शिकार होता है। यह भी तथ्य है कि 90% पत्रकार खुशी से घुंघरू बांधकर सत्ता के दरबार में पेश होने को तैयार हैं।
वे बिना दबाव या निर्देश के जोशी जी के फॉरवर्ड को हेडलाइन बनाते हैं। मामला इतना सीधा नहीं है। मेरी हार्दिक इच्छा है कि पानी सिर से ऊपर जाने के पहले मीडिया को सुधर जाना चाहिए।




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