नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर के चंदे में गड़बड़ी की रिपोर्टिंग करने वाले स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने बुधवार, 14 अक्टूबर को यूपी पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ को भेजा गया नोटिस रद्द कर दिया है, जिसमें पत्रकार का 3 महीने का डिजिटल डेटा मांगा गया था। साथ ही जब्त कार को 2 दिन में छोड़ने का आदेश दिया है।
क्या था यूपी पुलिस का नोटिस?
दरअसल, गाजियाबाद पुलिस ने 22 अगस्त को ‘X’ को BNSS की धारा 94 के तहत नोटिस भेजकर अभिषेक उपाध्याय के अकाउंट से जुड़ा 1 जून से 22 अगस्त 2026 तक का पूरा डेटा मांगा था। इसमें लॉगिन-लॉगआउट IP एड्रेस, ईमेल ID, मोबाइल नंबर, IMEI नंबर, लोकेशन, डिवाइस डिटेल्स और रजिस्ट्रेशन लॉग शामिल थे।
पुलिस का तर्क था कि यह डेटा अभिषेक का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जरूरी है, क्योंकि FIR के बाद वे मिल नहीं रहे हैं।
लेकिन अभिषेक के वकील सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय ने कोर्ट में बताया कि FIR 18 अगस्त को रोड रेज मामले में दर्ज हुई, जबकि पुलिस जून से ही डेटा मांग रही है। यह उनकी पत्रकारिता के सोर्स को ट्रेस करने की कोशिश है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा – यह Overkill है
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा –
_”Seizing data of 3 months prior to the date of alleged incident seems to be an overkill… यह जरूरत से ज्यादा है।”_
बेंच ने कहा कि पुलिस का यह कहना कि डेटा सिर्फ पता लगाने के लिए मांगा गया था, नोटिस के कंटेंट से मेल नहीं खाता। नोटिस में ऐसी जानकारी मांगी गई है जो जांच से सीधे जुड़ी नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया –
1. अपराध की घटना से पहले का कोई भी निजी या गोपनीय डेटा नहीं लिया जा सकता।
2. FIR के बाद भी डेटा तभी मांगा जा सकता है, जब आरोपी को पकड़ने के दूसरे सामान्य उपाय नाकाफी साबित हों।
3. 22 अगस्त का नोटिस रद्द किया जाता है और इस नोटिस से हासिल कोई भी जानकारी अभिषेक के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त और 7 सितंबर को दी गई गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा को अब *Absolute* कर दिया है। यानी अभिषेक उपाध्याय की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक रहेगी, बशर्ते वे जांच में सहयोग करें।
साथ ही कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि उनकी जब्त की गई कार को 2 दिन के भीतर रिहा किया जाए।
कोर्ट ने अभिषेक को अपनी रोड रेज FIR को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने की और पुलिस द्वारा डिजिटल डेटा लेने के लिए अनिवार्य गाइडलाइन बनाने की मांग को लेकर अलग याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी है।
अभिषेक उपाध्याय ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चंदे के दुरुपयोग और चोरी के आरोपों पर खोजी रिपोर्ट की थी। इसके बाद गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में शिप्रा मॉल के पास उनकी कार से बाइक सवार को टक्कर मारने, धमकाने और जातिसूचक टिप्पणी का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज की गई थी।
अभिषेक का दावा है कि यह FIR उनकी रिपोर्टिंग का बदला लेने के लिए पूरी तरह से Staged है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पुलिस ने FIR की कॉपी नहीं दी और आसपास के दुकानदारों को CCTV फुटेज डिलीट करने के लिए मजबूर किया।





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